पापा और मौसी का प्यार

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प्रेषक : रितेश

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम रितेश है और मेरी उम्र 22 साल की है। मेरी हाईट 5.4 इंच है.. रंग गोरा और लंड का साईंज 8 इंच है और में एक कॉलेज में पढ़ता हूँ। दोस्तों आज में जो कहानी बताने जा रहा हूँ वो एकदम सच्ची है दोस्तों ये कुछ 10 महीने पुरानी बात है.. जब में कॉलेज के 1st ईयर में था। मुझे अभी भी शायद याद है वो जनवरी का महीना था और बहुत ठंड पड़ रही थी। तभी अचानक मेरी माँ बीमार हो गयी और उन्हे तुरंत हॉस्पिटल में भर्ति किया गया। फिर घर पर मेरे अलावा मेरे 2 छोटे भाई और एक बहिन भी थी.. जो स्कूल में पढ़ते थे। फिर जब माँ हॉस्पिटल में होती थी तो बच्चो का खाने बनाने की समस्या होती थी इसलिए मेरी माँ ने अपनी छोटी बहन यानि कि मेरी मौसी को फोन करके कुछ दिनों के लिए बुला लिया।

मौसी को लेने पापा खुद रेलवे स्टेशन गये। फिर मौसी के आने से घर का खाना हम सभी सदस्यों को फिर से नसीब होने लगा था और बच्चे भी बहुत खुश थे। मौसी अपने दो लड़को के साथ आई थी उनके पति सरकारी दफ़्तर में चपरासी है। फिर कुछ दिन बाद ऐसे ही मेरी माँ की तबीयत बिगड़ती गयी जिसके कारण उन्हें एक महीना और हॉस्पिटल में रहना पड़ा। तभी इन एक महीनों में मौसी हमारे साथ बहुत घुल मिल गयी। फिर वो कहीं पर भी जाती तो पापा के साथ उनकी बाईक पर उनके साथ बैठकर जाती.. जैसे कि वो उनकी पत्नी हो और ये बात मुझे बहुत ख़टकती थी। लेकिन में ज्यादा ध्यान नहीं देता था। फिर में कॉलेज को सुबह जाता था और शाम को वापस आता था और मेरे भाई बहन भी शाम को स्कूल से आते।

फिर दिन भर मौसी और उनके दो बच्चे घर पर रहते और पापा सुबह ऑफीस चले जाते। मौसी दिखने में थोड़ी सांवली और थोड़ी मोटी थी। लेकिन उनके बूब्स बहुत बड़े बड़े थे और बड़ी भारी गांड थी और शायद उनका साईंज 36–34-40 होगा और मौसी हमेशा साड़ी पहनती थी और उनका ब्लाउज हमेशा टाईट होता था जिसमे से उनके बड़े बड़े बूब्स निकल कर आते थे। मौसी हमेशा लाल कलर की लिपस्टिक लगाती थी और माथे पर बड़ा सा सिंदूर लेकिन मौसी का स्वभाव बहुत ही अच्छा था। वो पापा के साथ एक दोस्त वाला व्यवहार करती थी। फिर पापा हमेशा किचन में जाकर मौसी का हाथ बांटते लेकिन ये बदलाव उनमे अचानक कैसे आया.. समझ में नहीं आया। वो कभी भी माँ को घर के किसी भी काम में मदद नहीं करते थे।

फिर एक दिन में कॉलेज से जल्दी घर पर आ गया। तभी मैंने देखा कि पापा की बाईक सामने वाले पार्क में खड़ी थी और मौसी के दोनों बच्चे बाहर आँगन में खेल रहे थे। तभी में घर में अंदर गया फ्रेश हुआ लेकिन घर पर कोई भी नहीं था और फिर में पानी पीने किचन में जाता.. उससे पहले ही मुझे किचन में से कुछ खुसुर फुसुर आवाज़ आने लगी। फिर मैंने छुपके देखा और फिर जो कुछ मैंने उस वक्त देखा में उसे देखकर एकदम से दंग रह गया.. पापा किचन में मौसी की बाहों में थे और फिर वो दोनों एक दूसरे से लिपट कर चुंबन ले रहे थे।

तभी मौसी की आवाज़ आ रही थी.. आज के लिये बस करो ना अब बच्चे आ जाएँगे। फिर पापा ने कहा कि मेरी जान आज तुम मुझे मत रोको। फिर यह कहकर पापा ने मौसी को करीब दबा लिया और फिर वो उनकी पीठ को और गांड को पीछे से मसलकर मसाज करने लगे और मौसी हल्की हल्की आवाज़ कर रही थी शह्ह्ह्ह आह्ह्ह। फिर मौसी अपने दोनों हाथ से पापा के बालों को सहलाने में लगी हुई थी। फिर पापा ने मौसी को उठाकर ऊपर बैठा दिया और उनकी साड़ी को ऊपर करके अपना एक हाथ अंदर डाल दिया और चूत के अंदर ऊँगली डाल दी। तभी मौसी के मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी.. शायद वो अब गरम हो चुकी थी। फिर पापा ने एक हाथ से उनके बूब्स भी दबाने शुरू किये और एक हाथ से चूत की चुदाई। तभी मौसी ने एकदम से उन्हें धक्का दिया और बोली जानू अब बस हो गया.. बाकी रात में करेंगे हर रोज की तरह। ये सुनकर में हैरान हो गया। फिर मुझे पता चल गया कि ये दोनों रोज रात में ऐसे ही हरकतें करते है।

फिर में कुछ देर टीवी देखता रहा और फिर टीवी की आवाज़ सुनकर पापा बाहर आ गये और फिर बोले तुम कब आए? तभी मैंने कहा कि अभी अभी एक मिनट पहले। तभी पापा इतना सुनकर दूसरे रूम में चले गये लेकिन उनके चहरे से साफ साफ दिख रहा था कि वो मुझसे कुछ छुपा रहे है। फिर में सोचने लगा कि में अपने रूम में सोता था इसलिए मुझे पता नहीं चलता था कि क्या होता था। हमारा छोटा घर है। एक बेडरूम जहाँ पर में अपने भाई बहन के साथ सोता हूँ और एक हॉल में मौसी अपने दोनों बच्चो के साथ सोती थी और पापा बालकनी में सो जाते थे।

तभी मैंने ठान लिया था कि आज की रात किसी ना किसी बहाने से इनका सारा कार्यक्रम मुझे देखना ही है। फिर में रात होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगा। फिर रात में सोने के वक़्त में अपने रूम में चला गया और मौसी हॉल में सोने के लिए गद्दे बिछा रही थी। मौसी अपने दोनों बच्चो के साथ सोती थी और उस दिन पापा ने बच्चो से कहा कि चलो बच्चो मेरे साथ बालकनी में सोते है आज में तुम्हे बहुत सी अच्छी अच्छी कहानियाँ सुनाउंगा। फिर ये कहकर पापा ने दोनों बच्चो को बालकनी में सुला लिया जो कि कुछ ही देर में सो गये। फिर मुझे उनका पूरा प्लान पता चल गया था।

फिर मौसी अकेले हॉल में थी वो भी यही चाहती थी की बच्चे जल्दी सो जाए तो उनका काम शुरू हो। फिर मैंने भी अपना पत्ता खोला और फिर हॉल में जाकर मौसी से बोला कि मौसी मेरे रूम में एक चूहा मरा है जिसकी बदबू आ रही है तो में आज सोफे पर सो जाता हूँ। तभी मौसी ने मुहं लटकाकर कहा कि ठीक है तुम चाहो जहाँ सो जाओ। फिर में सोफे पर सो गया अब मुझे लगा कि पापा नहीं आएँगे क्योंकि मेरे सामने ये कुछ नहीं करेंगे और फिर में ऐसे ही लेटा रहा। तभी कुछ देर बाद आधी रात में मैंने सोने का नाटक करते हुए थोड़ी आँख खोलकर देखा कि तभी पापा मौसी के पास आकर बोले.. उठो ना। तभी मौसी बोली अरे तुम.. आज नहीं देखो रितेश यहीं पर सोफे पर सोया है कुछ 5 मिनट की बहस के बाद पापा बोले देखो वो सो रहा है हम बिना आवाज़ करे सब कुछ करेंगे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

तभी मौसी बोली कि अच्छा बाबा और ये कहकर मौसी और पापा ने पप्पी ले ली और फिर मौसी बोली ओह्ह तुम भी ना बदमाश हो बड़े। ये कहकर वो दोनों एक गद्दे पर सो गये और फिर दोनों एक दुसरे को सहलाने लगे। फिर मौसी ने अपने बाल खुले छोड़ दिए और फिर पापा को बोली कि ओह जानू मेरे पास आओ ना। फिर पापा बनियान और लूँगी में थे और मौसी साड़ी में थी। तभी पापा बोले कि अरे रानी क्या ये साड़ी पहनी तुमने तुम्हारे पास मेक्सी या गाउन नहीं है क्या? तभी मौसी बोली कि नहीं में लाना भूल गयी और दीदी की मेक्सी मुझे फिट नहीं होती। तभी पापा बोले कि कोई बात नहीं हम कल शॉपिंग पर चलते है तुम एक अच्छी से देखकर ले लेना।

तभी मौसी बोली कि हाँ मुझे ब्रा और पेंटी भी लेनी है। फिर पापा बोले कि क्यों तुम्हारे पास नहीं है क्या? फिर मौसी बोली कि अरे बाबा तुमने मेरे बूब्स दबा दबा कर बड़े कर दिए है अब वो मेरे फिट नहीं हो रहे.. मुझे अब बड़ी साईज़ की ब्रा लेनी पड़ेगी और मेरी पेंटी भी फट गई है। तभी पापा बोले कि हाँ बाबा जो लेना है ले लेना। फिर में चुपचाप उन लोगों की बातें सुन रहा था फिर थोड़ी देर में दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। फिर मौसी हर बार अपने दोनों पैरो से पापा के पैरो पर रगड़ती रही। फिर कुछ देर बाद मौसी ने अपने पैर से पापा की लूँगी को ऊपर किया और अपना एक हाथ लूँगी के अंदर डाल दिया।

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तभी पापा ने मौसी के होंठो पर एक चुम्मि दी मुआहह। फिर मौसी ने भी एक चुम्मि दी अहमम्मुहह। फिर मौसी अपनी जीभ पापा के होंठो पर फैरने लगी। तभी पापा ने तुरंत मौसी की जीभ को अपने मुहं में डाल लिया। फिर पापा ने लूँगी पूरी हटा दी अब पापा बनियान और अंडरवियर में थे। फिर मौसी बोली में नहीं कपड़े उतारूँगी मुझे बहुत शरम आती है। तभी पापा बोले कि मत शरमाओ मेरी जान.. ये कहकर पापा ने मौसी को फिर चूमना शुरू किया और फिर चूमते चूमते पापा ने मौसी के ब्लाउज का बटन खोल दिया और मौसी चूमने में व्यस्त थी। फिर उनके पता चलने से पहले ही मौसी ब्रा में थी। तभी मौसी ने अपने ब्लाउज को निकालकर साईड में रख दिया। फिर मौसी ने भी बिना कहे अपनी साड़ी उतार दी। अब मौसी ब्रा और पेंटी में थी और पापा अंडरवियर में थे और फिर पापा उसके बूब्स दबा रहे थे। तभी मौसी की भी सांसे तेज होती जा रही थी। फिर पापा बूब्स दबा रहे थे लेकिन वो ब्रा पहने हुई थी। फिर पापा ने ब्रा और पेंटी को मौसी से आजाद कर दिया। फिर जैसे ही पापा ने ब्रा उतारी उनके गोर गोर 36 के बूब्स पापा के सामने आ गए। फिर पापा पागल से होने लगे और मौसी को नीचे दबाकर उसके बूब्स पर टूट पड़े। फिर एक हाथ से उनके सीधे बूब्स को और जोर से और फिर दूसरे बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूस रहे थे और हल्के हल्के दबा रहे थे। फिर पापा के हर बार दबाने के साथ मौसी का जोश बढ़ता जा रहा था और फिर वो पापा के सर को पकड़कर अपने बूब्स में दबा रही थी। फिर पापा जोर से उनको चूसने और मसलने लगे।

फिर मौसी को भी मजा आने लगा और मौसी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी उम्म हहाहा मरी में थोड़ा धीरे चूसो प्लीज..। क्या मस्त चूचियाँ थी उनकी बहुत गोरी, सॉफ्ट और बहुत ही नाज़ुक पापा बेकाबू हो गये थे। फिर पापा ने उनकी चूचियों को जी भरकर चूसा और फिर वो चूसते-चूसते एक हाथ को उनकी चूत पर ले गये और फिर ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाने लगे। फिर थोड़ा नीचे आकर उनकी चूत पर जीभ फैरने लगे तो मौसी पागल हो उठी। फिर पापा धीरे-धीरे उनकी चूत को सहलाने लगे।

सच में मौसी की चूत बहुत ही सेक्सी और कोमल थी। पापा तो बस मदहोश हो गये थे। फिर पापा धीरे धीरे उनकी चिकनी चूत को सहलाने लगे और उनकी चूत के दाने को उँगलियों से धीरे धीरे मसलने लगे। तभी मौसी की चूत बहुत गीली हो चुकी थी और मौसी अपने पैरो को सिकोड़ने लगी। तभी पापा समझ गये कि अब वो पूरी तरह से गरम हो चुकी है। फिर पापा ने जल्दी से उनकी पेंटी को खोलकर उसे उतार दिया और फिर चूत को चूमने लगे। तभी मौसी पापा के सर को जोर जोर से दबाने लगी और पापा भी जोश में आकर उनकी चूत को चूसने लगे। तभी पापा अपने आपे से बाहर हो रहे थे।

फिर पापा ने अब मौका गंवाए बिना मौसी की चूत के पास मुहं लेकर गये और फिर चूत पर चूम लिया। तभी मौसी ने अपने दोनों पैर चौड़े कर दिये। फिर मौसी की चूत को देखकर साफ़ पता लग रहा था कि मौसी ने अपने बाल आज ही साफ़ किये थे मतलब आज वो इसके लिए तैयार थी। फिर पापा चूत के दाने को जीभ से चाट रहे था और जीभ को अंदर भी डाल रहे थे मौसी की चूत में। फिर मौसी बहुत गरम हो गई थी और वो अपनी कमर उठाकर पापा की जीभ को अंदर लेने लगी। फिर मौसी के दोनों हाथ पापा के सर पर थे और वो पापा के सर को दबाकर उनका मुँह अपनी चूत के और पास ले जाने की कोशिश कर रही थी।

तभी पापा उठे और अपनी अंडरवियर जल्दी से उतार दी और फिर पापा जल्दी से नीचे आए और फिर अपने दोनों पैर फैला कर लेट गये और मौसी को अपने ऊपर खींच लिया। तभी मौसी समझ गई और फिर मौसी लंड को हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी। फिर जैसे ही मौसी ने हिलाना शुरू किया पापा तो जन्नत का मजा महसूस करने लगे। फिर पापा ने लंड को मुहं में लेने को कहा। तभी मौसी तुरंत ही मान गई। फिर धीरे-धीरे मौसी ने लंड के टोपे को मुँह में ले ही लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। फिर कुछ 15 मिनट तक मौसी ने पापा के लंड को चूसा होगा।

तभी मौसी बोली कि अब मुझसे कंट्रोल नहीं होता अब डाल दो। पापा भी अब तैयार थे तभी पापा ने एक तकिया उनकी कमर के नीचे लगाया और फिर मौसी की जाँघें अपनी जाँघों पर चढ़ा लीं। फिर पापा अपने लंड को मौसी की चूत पर फैरने लगे और अब उनकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी। फिर पापा अपने लंड को धीरे धीरे मौसी की चूत में घुसाने लगे.. लेकिन उनकी चूत बहुत गीली थी। फिर लंड का सुपाड़ा चूत के अन्दर जाते ही वो जोर से बोली कि मुझे बहुत दर्द हो रहे है। फिर पापा वहीं पर रूक गये और उनकी चूचियों को सहलाने लगे और फिर मौसी के होठों को चूमने लगे। तभी थोड़ी देर में मौसी जोश में आ गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। तभी पापा ने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया और फिर लंड उनकी चूत में तीन इंच घुस गया। तभी मौसी जोर से चिल्लाने लगी और पापा ने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये।

फिर मौसी आँखें बंद किये सिसकियाँ भर रही थी। तभी पापा को सही मौका मिला और अचानक उन्होंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया। तभी वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी और कहने लगी कि बाहर निकालो शायद बच्चे उठ चुके है। तभी पापा वहीं पर रूक गये और फिर पापा ने मौसी को प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लंड चूत में चला गया है। अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद में जो मज़ा आएगा वो तुम्हे तुम्हारा पूरा दर्द भुला देगा और बच्चो की तुम चिंता मत करो मैंने आज खाने में नींद की कुछ गोली मिला दी है। तभी मेरे समझ में आया कि पापा ने आज मुझसे खाने के लिये क्यों पूछा था लेकिन मैंने खाना खाया ही नहीं।

फिर पापा ने मौसी के लाख कहने पर भी अपना लंड उनकी चूत से बाहर नहीं निकाला। फिर पाँच मिनट तक पापा सिर्फ़ बूब्स को चूसता रहे और मौसी के पूरे शरीर पर हाथ फैरते रहे। तभी धीरे धीरे मौसी का दर्द कम हुआ और फिर पापा को जोश आने लगा और वो पापा से चिपक गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। फिर उनकी चूत लंड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती। फिर पापा इशारा समझ गये और फिर पापा ने धीरे धीरे अपने लंड को उनकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

तभी थोड़ी देर में मौसी को भी मज़ा आने लगा और फिर मौसी भी गांड को उठाकर चुदाई का मज़ा लेने लगी। फिर करीब 15 मिनट तक पापा ने उसे बिना रुके चोदा और इतनी देर में मौसी की चूत भी गीली हो गई और उनका दर्द कम हो गया और मौसी भी बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी। फिर मौसी भी नीचे से गांड हिलाकर पापा का साथ दे रही थी और बोल रही थी अह्ह्ह ईईइ जोर से तेज और तेज करो.. मुझे चोदते रहो जोर से और जोर से चोदो मुझे।

तभी पापा ने पूरे जोश में आकर तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। फिर कुछ देर बाद मौसी एकदम से अकड़ने लगी और पापा की पीठ और कन्धों पर नाख़ून चुभाने लगी और फिर एकदम से पापा से लिपट गई और झड़ गई.. लेकिन पापा तो अभी भी जोश में थे। तभी मौसी बोली कि रुको मत पता नहीं कब मौका मिले फ़िर उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े लेकिन पापा रुके नहीं और फिर पापा अपने लंड को अंदर बाहर करते रहे। कुछ देर बाद मौसी को भी मज़ा आने लगा और मौसी भी पापा का साथ देने लगी।

तभी वो अपनी कमर को पापा के साथ साथ आगे पीछे करने लगी। इसलिए मज़ा और ज़्यादा आने लगा ऐसा करते करते कुछ देर बाद मौसी फिर झड़ गयी। उनकी गरम चूत गीली हो गई और वो शांत पड़ गई लेकिन पापा रुके नहीं और फिर से उन्हें चोदते रहे। तभी मौसी ने पापा को रुकने को कहा लेकिन पापा रुके नहीं और अपना काम करते रहे। फिर लगभग 10 मिनट के बाद पापा भी झड़ने लगे तो पापा ने पूछा कि बाहर निकालूँ? तभी मौसी बोली कि में मजा लेना चाहती हूँ तुम अंदर ही डाल दो। फिर पापा ने जोर जोर से झटके मारे और फिर थोड़ी देर में अपना सारा वीर्य मौसी की चूत में निकाल दिया।

दोस्तों क्या बताऊँ जिस समय उन दोनों की चुदाई चल रही थी मेरा लंड खड़ा होकर कुतुबमीनार बन चुका था। मुझे उनकी चुदाई देखकर मुठ मारने की इच्छा होने लगी। लेकिन वो दोनों मेरी छाती पर मूंग दल रहे थे और में लंड को काबू में ले रहा था। उनकी चुदाई से में सातवें असमान में उड़ रहा था ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं मिला था।

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तभी मौसी बोली कि तुम्हारे गरम गरम वीर्य को में अपनी चूत में महसूस करना चाहती थी। तभी पापा ने पूछा कि तुम्हे मजा आया ना? फिर मौसी बोली कि अभी तो पूरी रात है तुम तो बिना रुके मजा देते रहो। आज हमे बच्चो की कोई चिंता नहीं। फिर उस रात पापा ने 3 बार और सेक्स किया और फिर पापा  और मौसी दोनों फिर वापस अपनी अपनी जगह पर आकर सो गये। फिर पापा ने सुबह उठकर दिनचर्या का काम पूरा का किया और ऑफिस चले गए। फिर जब कभी भी उन्हें मौका मिलता वो फिर से चुदाई करते थे। फिर जब माँ की तबियत ठीक हुई तब कहीं जाकर मौसी अपने घर गई और वो भी मेरे कई बार ताने मारने पर। लेकिन मुझे अभी भी शक है कि वो दोनों कहीं ना कहीं चुदाई जरुर करते होंगे लेकिन मैंने अभी तक माँ को ये बात नहीं बताई ।।

धन्यवाद …

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