कहानी एक मजबूर बेटे की 1

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प्रेषक :शाहिद
हाय रीडर्स. मेरा नाम शहीद है। दोस्तों आप सच माने या झूठ. मैं आप को कभी ये नही कहना चाहता के आप भी ऐसा ही करना जेसा मैंने किया या ज़िंदगी ने मुझसे कराया लेकिन शायद आप को मैं ये समझा सकूँ और इसलिये ये आप को बता रहा हूँ ताकि शायद इस तरह मेरा गुनाह कुछ

कम हो जाये. यह जो कुछ भी हुआ यह कहानी नही बल्कि आपबीती है एक मजबुर इंसान की. उस वक़्त मैं 18 साल का था. और 12वी के पेपर दे चुका था.

मेरे अलावा मेरे घर मैं मेरी अम्मी जी और छोटी बहन रहते थे. मेरा एक बड़ा भाई भी है जो दुबई रहता है और मेरे अब्बू जी मर चुके हैं 5 साल पहले. मेरे बड़े भाई का नाम महमूद है,मेरी अम्मी जी का नाम सजदा है और मेरी छोटी बहन का नाम रेहाना है. रेहाना 9वी क्लास मैं पढ़ती है. और मेरे साथ बहुत शरारत करती है. और घर मैं सबकी लाड़ली है मैं अगर कभी गुस्से मैं उससे कुछ कह दूँ तो अम्मी जी से मुझे बहुत डाट पड़ती है। लेकिन वेसे देखा जाये तो अम्मी जी मुझ से कुछ ज्यादा प्यार करती थी. जेसा की अक्सर घरो मैं होता है. इन दिनो में किसी काम से बाहर था और मैंने नया नया काम शुरु किया था इसलिये मेरा दिल और क़िसी चीज़ की तरफ लगता ही नही था बस हर वक़्त दिमाग में बस यही चीज़ रहती थी की मेरे सभी दोस्तो के गर्ल फ्रेंड्स थी पर मैं इस मामले मैं भी काफ़ी बुज़दिल निकला था इसलिये बस सोचने से ही काम चलता था. और वेसे भी मैं घर से कम ही निकलता था. क्योकी मेरे कोई ज़्यादा दोस्त भी नही थे बस शाम को थोड़ी देर के लिये जाता.

 

मैं बहुत ज़्यादा अच्छा लड़का नही था और अम्मी जी की बात भी नही सुनता था. और इस बात पर वो अक्सर दुखी भी रहती और कहती तुम्हारे अब्बू जी भी नही हैं तुम तो मेरी बात सुना करो बस अगर मेरा मूड होता तो मानता वरना नही. एक दिन अम्मी जी ने मुझे किचन से आवाज़ दी बेटा एक बात सुनो ज़रा, मेरा लंड उस वक़्त खड़ा था मैं जाना नही चाहता था लेकिन अम्मी ने जब गुस्से से बुलाया तो मैं चला गया. मैंने अपने आगे अपने दोनो हाथ बाँध रखे थे ताकि पेन्ट मैं से मेरा खड़ा लंड नज़र ना आये.लेकिन जब मैं किचन में गया अम्मी ने नीचे देखा तो फिर बड़ी गौर से मेरी तरफ देखा मेरे ख्याल में उन्हे शक़ हो गया था आख़िर वो बच्ची नही थी. उन्होने कहा फ्रिज से पानी की बोतल निकाल दो मैंने जल्दी से बोतल निकाल कर दी और किचन से बाहर आ गया मैं बहुत शर्मिन्दगी महसूस कर रहा था.
फिर एक दिन टी.वी देखते हुये मेरा लंड खड़ा हो गया उस वक़्त अम्मी जी बिल्कुल मेरे साथ बेठी हुई थी और मैंने क्योकी ट्राउज़र पहना हुआ था और उस में से खड़ा लंड साफ नज़र आता है मैंने हाथ से छुपाने की बड़ी कोशिश की लेकिन अम्मी जी की नज़र पड़ गयी. और उन्होने मुझसे कोई बात किये बिना टी.वी बन्द किया और उठ कर चली गयी  इससे मुझे अंदाज़ा हो गया की उन्होने कुछ देखा है. एक दिन रेहाना मुझसे शरारत कर रही थी की मेरा हाथ उसके पेट पर लगा तो पहली बार मैंने उसके लिये कुछ महसुस किया लेकिन मैंने इस ख्याल को ये सोच कर छोड़ दिया की वो मेरी बहन है. अब मैं भी नोट कर रहा था की अम्मी जी अब मुझ पर नज़र रखती थी और मेरी हरकत नोट कर रही थी. यह गर्मियो के दिन थे और सख़्त गर्मी पड़ रही थी. अम्मी जी किचन मैं दोपहर के लिये खाना बना रही थी की मैं किचन मैं गया लेकिन अम्मी जी की तरफ देख कर एक़दम मुझे झटका लगा वो पसीने मैं नहा रही थी और उनके पूरे कपड़े गीले हो कर जिस्म से चिपके हुये थे जिसकी वजह से उनके जिस्म का पूरा दीदार हो रहा था। मैं जल्दी से किचन से बाहर आ गया मैं अम्मी जी को ऐसे नही देखना चाहता था लेकिन मेरे दिमाग मैं कोई गलत ख्याल नही आया था क्योकी मैं ऐसा सोच भी नही सकता अपनी अम्मी जी के बारे मैं.
इसी तरह दिन गुज़रते रहे और कोई छोटी मोटी बात बीच मैं हो जाती. जेसे एक दिन दोपहर मैं बिजली चली गयी  उस दिन बहुत तेज की गर्मी थी हर तरफ़ से पसीना बह रहा था. अम्मी जी बार बार कह रही थी उफ़ यह गर्मी तो आज जान ले लेगी. अरे शाहिद बेटा तुम तो शर्ट उतार दो. अच्छा अम्मी जी और मैंने अपनी शर्ट उतार दी खैर अम्मी जी नहाने चली गयी थोड़ी देर बाद उन्होने बाथरूम से आवाज़ दी शाहिद मुझे टावल तो देना मैं ले जाना भूल गयी हूँ. मैं उन्हे टावल देने गया तो उन्होने बाथरूम मैं से अपना हाथ बाहर निकाला जिस पर साबुन लगा हुआ था और मुझसे टावल ले लिया. उस दिन रात को अम्मी जी ने मुझे अपने कमरे मैं बुलाया और कहा बेटा ज़रा मेरी टाँगे और हाथ दबा दो आज मैं बहुत थक गयी  हूँ. मुझसे नही होता अम्मी जी आप रेहाना को कहीये ना. नही बेटा वो सो गयी  है उसे सुबह स्कूल जाना होता है, चलो यहाँ आओ काम चोरी ना किया करो.
अम्मी जी एक तो आप भी ना हर वक़्त तंग करती रहा करिये. और मैं बेड पर बेठ कर उनकी टाँगे और हाथ दबाने लगा. शाहिद थोड़ा ज़ोर से दबाओ. अम्मी जी मुझसे तो ऐसे ही दबता है नही दबवाना तो ठीक है. अच्छा तू ज्यादा बाते ना कर और दबा. यह मेरी सलवार को थोड़ा थोड़ा उपर कर ले और अम्मी जी ने अपनी कमीज के बाज़ू भी कोहनियो तक उपर कर लिये और मैंने उनकी शलवार को भी थोडे ऊपर कर दिया और उनके मोटे मोटे बाज़ू और टाँगे दबाने लगा. थोरी देर बाद अम्मी जी ने कहा अब बस करो और सो जाओ बहुत देर हो गयी है. मैं सोने जाने लगा तो वो बोली चलो आज यहीं सो जाओ. मैंने कहा जी लेकिन मुझको अपने कमरे मैं सोना है. शाहिद कभी बात मान भी लिया करो वेसे भी मुझे तुम से कुछ बात करनी है. मैंने थोड़े गुस्से और लापरवाही से कहा अच्छा इधर ही सो जाता हूँ. और मैं अम्मी जी के साथ उनके डबल बेड पर लेट गया.
अम्मी बोली : शाहिद तुम्हारी शादी कर दूं.
शाहिद : आज आप को मेरी शादी का ख्याल कहाँ से आ गया वो भी इस वक़्त.
अम्मी जी : बस आ गया क्यो तुम को शादी नही करनी
शाहिद : जी करनी तो है पर इतनी जल्दी नहीं.
अम्मी जी : अच्छा तो यह जल्दी है. तुम 18 साल के हो गये हो. और वेसे भी मैंने कुछ दिनो से महसुस किया है की अब तुम्हारी शादी कर देनी चाहिये.
शाहिद : मैं दिल मैं थोड़ा सा शर्मिन्दा भी हो गया लेकिन मैंने छुपाते हुये कहा जी वो बस अभी रहने दे इस बात को. वेसे भी शादी के बाद आदमी की आज़ादी और खुशियाँ सब ख़त्म हो जाती हैं.  
अम्मी जी: ओये यह तुम से किसने कहा की मैं खुश नही हूँ.
शाहिद : जी वो तो हैं.
अम्मी जी: हाँ वेसे तुम कहते सही हो शादी के बाद इंसान की खुशीया ख़त्म हो जाती है अगर ओलाद तुम जेसी हो जो मेरी कोई बात नही सुनते.
शाहिद : अम्मी जी आप फिर शुरु हो गयी .
अम्मी जी : बेटा तुम से किसने कहा है मैं खुश हूँ हाँ यह सच है मैं खुश नहीं हूँ. और इसकी एक वजह तुम भी हो.
शाहिद : और दूसरी वजह अम्मी जी
अम्मी जी : वो भी कोई है तुम छोड़ो इस बात को बेटा थोड़ा सा माँ का ख्याल भी कर लिया करो.
अच्छा अच्छा अब लेक्चर देना बस भी करो मुझे नींद आ रही हैं. और मैं करवट बदल कर सो गया. अगले दिन रेहाना स्कूल से जल्दी घर आ गयी और उसने बताया की कल उनके स्कूल वाले उन सब को ट्रिप पर कही ले जा रहे हैं दो दिनो के लिये इसलिये आज जल्दी छुट्टी दे दी है. लेकिन अम्मी जी को मनाना मुश्किल था. रेहाना ने मुझे कहा भाई आप कुछ करिये. मैं अम्मी जी के पास गया और उनसे कहा अम्मी जी प्लीज रेहाना स्कूल ट्रिप के साथ जाना चाहती है उसे जाने दे. शाहिद मैं उसे इजाज़त नही दे सकती. अम्मी जी प्लीज. शाहिद तुमने कभी मेरी कोई बात मानी है जो मैं मानू. मैंने हसंते हुये कहा अच्छा आगे से मानूंगा. मैं जानती हूँ तुम झूठ बोल रहे हो लेकिन चलो तुम्हे अज़मा लेते है. ठीक है मेरी तरफ़ से रेहाना को इजाज़त है. मैं रेहाना के कमरे मैं गया और उसे यह खबर दी वो बहुत खुश हुई और बोली थैंक यू भाई. कोई बात नही और मैं नई शरारत से उसके मुँह पर हल्का सा थपड़ मारा. भाई मैं तुम्हे छोडूगी नही. मैं ज़ोर से हंसा. अगले दिन सुबह सुबह रेहाना चली गयी .
अब अम्मी जी ने मुझे कहा अब तुम बाहर ना जाना दो दिन मैं घर मैं अकेली हूँ. अच्छा तो अब मैं आप की चोकीदारी के लिये बेठा रहूं. शाहिद तुम हर बात का उलटा जवाब ना दिया करो मैं तुम्हारी माँ हूँ कभी सही तरह भी बात किया करो. अच्छा ठीक है ठीक है. उस दिन अम्मी जी ने मेरी पसन्द का खाना बनाया. और जब मैं खाना खा चुका था तो मेरी झूठी प्लेट मैं उन्होने खाना शुरु कर दिया. शाम को अम्मी जी जब चाय बना रही थी तो वो एक खाली कप ले कर बाथरूम मैं चली गयी  और फिर जब वो थोड़ी देर बाद बाहर आईं तो मैं ये देखने के लिये उठा की कप मैं क्या है तो कप मैं दूध था. मैंने पूछा यह बाथरूम से दूध कहाँ से आया. क्यो तुम्हे क्या और फिर अम्मी जी ने वो दूध चाय मैं डाल दिया. जब मैं चाय पी रहा था तो अम्मी जी ने मुझसे पूछा आज चाय का स्वाद केसा है अच्छा है ना. हाँ लेकिन आज आपने इस मैं कुछ ख़ास डाला है क्या. हाँ यही समझ लो. और वो मेरी तरफ देख कर थोड़ा सो मुस्करा दी.
अम्मी जी : बेटा उस दिन मैंने तुम से तुम्हारी शादी की बात की थी याद है ना तुम्हे 
शाहिद : जी हाँ याद है. तो फिर
अम्मी जी : तो फिर क्या तैयारी कर लो.
शाहिद : जी पर किससे और इतनी जल्दी अभी मेरी उम्र ही क्या है.
अम्मी जी : अच्छा जी चलो नही करती तुम्हारी शादी मगर?
शाहिद : मगर क्या. आप खामोश क्यो हो गयी  हैं.
अम्मी जी : चलो छोड़ो बाद मैं बात करेगे.
शाहिद : अच्छा जेसी आप की मर्ज़ी.
 
अच्छा तो दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में . . .
धन्यवाद …

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