चुदक्कड़ काकी की गांड चोदी

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प्रेषक : शिवम…

हैल्लो दोस्तों, सभी कुंवारी जवान लड़कियों और सेक्सी भाभियों। दोस्तों में आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी आज की सच्ची चुदाई की कहानी को सुनाने आया हूँ और इसको शुरू करने से पहले में अपना परिचय दे देता हूँ। दोस्तों मेरा नाम शिवम है, में कानपुर का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 23 साल है। दोस्तों में दिखने में ठीकठाक मेरा गोरा गठीला बदन किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बहुत है और आप सभी की तरह में भी सेक्स करने और कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने का बहुत शौकीन हूँ। मुझे यह सब करने बड़ा मस्त मज़ा आता है। अब में अपनी आज की उस घटना को सुनाना शुरू करता हूँ, जिसके लिए आज में यहाँ पर आया हूँ। दोस्तों यह घटना तब मेरे साथ घटी जब में अपने किसी दूर के रिश्तेदार के यहाँ पर गया हुआ था, वहां पर पहले से ही मेरी काकी बड़ी हॉट सेक्सी थी और मेरे सेक्स करने का अंदाज़ मेरी काकी को पहले से ही पता था और उन सभी बातों को सुनकर वो तो कब से यही इंतज़ार में थी कि कब उनको मेरे साथ अपनी चुदाई का मौका मिले और वो मेरे साथ अपनी चुदाई करवाकर पूरी तरह से संतुष्ट हो जाए और उनको मेरे साथ सेक्स करने की बड़ी इच्छा थी।

दोस्तों वो मुझे हर दिन मुझे अपनी नशीली नजरों से देखा करती थी, जब भी उनको मौका मिलता वो मेरे पास आकर हंसी मजाक करने के साथ साथ दो मतलब वाले शब्द बोलकर मुझे बड़ी हंस हंसकर बातें किया करती। फिर किसी भी बहाने से मुझसे चिपकने की कोशिश किया करती और हर कभी मेरे सामने आकर किसी भी बहाने से मुझे अपने बड़े आकार के बूब्स को दिखाकर मेरे ध्यान को अपनी तरफ करने की पूरी पूरी कोशिश किया करती थी। अब में उनके मन की वो सभी बातें बड़ी अच्छी तरह से समझ जान गया था, लेकिन में उनके साथ कुछ भी करने के लिए किसी अच्छे मौके की तलाश में था। एक दिन हुआ यह घर कि घर के सभी लोग किसी मंदिर पर दर्शन के लिए निकल गए, लेकिन काकी ने उनको झूठा बहाना बनाकर कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए में आप सभी के साथ नहीं आ सकती और जब मुझसे जाने के लिए कहा गया कि तुम भी चलोगे ना? तब मैंने उनको कहा कि नहीं मुझे तहसील में कुछ जरूरी काम है और फिर वो लोग मुझसे बोले कि हाँ ठीक है तुम भी यहीं रुक जाओ घर की रखवाली भी हो जाएगी। फिर उन सभी के चले जाने के बाद घर में अब में और मेरी चुदाई के लिए प्यासी काकी ही रह गये थे और वो घर भी गाँव में बिल्कुल एकांत जगह पर था इसलिए वहां पर कोई ज्यादा आता जाता भी नहीं था।

फिर शाम को में अपना सारा काम निपटाकर वापस घर आ गया और मैंने पहुंचकर देखा तो उस समय मेरी काकी खाना बना रही थी। फिर मेरे आने की आहट को सुनकर वो मन ही मन बहुत खुश हो चुकी थी। अब मैंने काकी के खिले मुस्कुराते हुए उस चेहरे को देखकर उनको पूछा कि क्या हुआ आज आप बड़ी खुश नजर आ रही है? तो काकी ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं और फिर कुछ देर बाद हम दोनों रात को खाना खाकर हम सोने की तैयारी करने लगे थे। फिर में अपने कमरे में सोने के लिए जाने लगा तो उसी समय काकी ने मुझसे कहा कि तुम भी आज मेरे कमरे में ही सो जाओ, क्योंकि मुझे अकेले में मुझे बहुत डर लगता है। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर हम दोनों उसी कमरे में सो गये और करीब रात के 11 बजे जब तक मुझे हल्की सी नींद ही आने लगी थी। उसी समय मेरी काकी ने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर वो अपने बूब्स को सहलाने लगी थी। अब में उनकी इस हरकत की वजह से जाग उठा और मैंने देखा कि उस समय मेरा वो हाथ मेरी कामुक काकी की उभरी हुई मुलायम छाती पर था और मेरी काकी मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर अपने बूब्स को मसल रही थी।

अब मैंने बिल्कुल अंजान बनकर उनको कहा कि काकी यह सब आप क्या कर रही हो? तब उसने कहा कि मुझसे अब रहा नहीं जाता, जब से मैंने तुम्हारी चुदाई की वो बातें सुनी है तब से मेरा भी दिल तेरे साथ यह सब करके अपनी जमकर चुदाई करवाने के लिए तरस रहा है। अब में उनकी वो बातें सुनकर मन ही मन सोचने लगा कि आज इस समय बिल्कुल अकेले में जमकर चुदाई करने का विचार बुरा तो नहीं है और फिर में उनकी चुदाई करने के लिए तैयार हो गया। अब मैंने सबसे पहले उसको चूमना प्यार करना शुरू कर दिया, में कभी उसके रसभरे होंठो पर, कभी गालों पर, कभी गले पर भी चूमते हुए साथ ही साथ में अपने एक हाथ से उसके बूब्स को भी मसल रहा था। अब वो मेरे इतना सब करने की वजह से जोश में आकर बहुत गरम होकर मेरे तनकर खड़े लंड को मेरी पेंट के ऊपर से मसल रही थी। फिर उसी समय मेरा लंड बहुत जोश में आ चुका था और उसने छूकर महसूस करके खुश होकर मुझसे कहा कि वाह तेरा लंड वो बहुत बड़ा लगता है, आज मुझे इसको अपनी चूत के अंदर लेकर मज़ा आ जाएगा, लेकिन जब तू मेरी चुदाई करे तो थोड़ा सा सम्भलकर करना, क्योंकि यह मुझे आज मज़े के साथ ही बड़ा तेज दर्द भी देने वाला है।

फिर मैंने उनकी बात पर मुस्कुरा दिया और वो दोबारा कहने लगे कि में तुझे हंसने के लिए नहीं बोल रही तू ध्यान से मेरी बात को समझकर यह काम पूरा करना, क्योंकि इतना मोटा तो तेरे काका का भी नहीं है और इसलिए मुझे इतना मोटा लेने की आदत बिल्कुल नहीं है। फिर मैंने वैसे ही उनको हाँ कह दिया, क्योंकि मुझे तो उनसे अपना इतने दिनों पुराना बदला जो लेना था। अब मैंने धीरे धीरे उसके सारे कपड़े उतारने शुरू किए, सबसे पहले मैंने उसकी साड़ी को उतार दिया और फिर ब्लाउज को भी उतार दिया। फिर उसके बाद उसके ब्रा के हुक को खोलकर मैंने एक बार फिर से चूमना चाटना शुरू कर दिया, कभी में बूब्स को मसलता और कभी बूब्स को अपने मुहं में भरकर चूसता। दोस्तों में इतना जोश में आकर ज़ोर से बूब्स को मसल रहा था कि उसके मुहं से अब आआहह ऊफ्फ्फ मुझे दर्द होता है कि आवाज़ सुनाई देने लगी थी। फिर मैंने उसके पेटिकोट को भी उतार दिया और उसके बाद पेंटी को भी निकाल दिया और उसने मेरी पेंट को उतार दिया। अब हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरे नंगे थे, उसी समय मैंने उसको कहा कि काकी तुम अब मेरे लंड को चूसो। अब उसने मुझसे कहा कि उसने कभी लंड नहीं चूसा, यह काम वो कैसे कर सकती है? फिर मैंने उनको पूछा क्या काका ने कभी तुमसे अपना लंड नहीं चुसवाया? उसने जवाब में ना कहा।

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फिर उसको मैंने पूछा क्या काका ने कभी तेरी चूत को भी नहीं चाटा? फिर से उसने साफ मना कर दिया और मैंने उसको अब बेड पर लेट जाने के लिए कहा। दोस्तों मैंने देखा कि उसने मेरे लिए अपनी चूत के बालों को पहले से ही साफ कर रखा था और अब मेरे सामने उसकी एकदम साफ गोरी चिकनी चूत थी, जिसको देखकर मेरा मन ललचाने लगा था। अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ चुके थे और एक दूसरे को चूसने लगे थे, मैंने उसको कहा कि तुम मेरा लंड चूसो और जो भी निकले उसको पी जाना और में तुम्हारी चूत को चूसता हूँ। फिर कुछ देर तक पहले तो वो मना करती रही और उसके बाद उसने ऐसा करने के लिए हाँ कह दिया और मैंने जब उसकी चूत पर अपने हाथ को घुमाया तब छूकर महसूस किया कि उसकी चूत बहुत गरम थी वो उबल रही थी और वो बहुत गरम गीली भी हो चुकी थी। फिर हम दोनों एक दूसरे का चूसने लगे थे उफफफफ्फ़ आह्ह्ह ऊऊह्ह्ह वो इतनी ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी कि मुझे लगा कि यह शौर सुनकर अगर कोई बाहर हुआ तो तुरंत समझ जाएगा कि अंदर मज़ेदार चुदाई चल रही है। फिर कुछ देर बाद में झड़ गया और उसने मेरे लंड का पूरा वीर्य चूसकर पीना शुरू किया और मैंने भी अपनी जीभ से उसकी चूत का रस चाटकर चूसकर अपने अंदर गटक लिया और उसको मस्त मज़ा दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उसने मुझसे कहा कि आज से पहले मैंने कभी इतना मज़ा नहीं किया और इसको चूसने से इतना मज़ा आता है, यह तो मुझे आज तक पता ही नहीं था, वरना में यह सब बहुत पहले करके इसके मज़े ले चुकी होती। अब में धीरे धीरे आराम से उसके जिस्म के साथ खेले जा रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी। फिर कुछ देर बाद मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया और अब मैंने उसको कहा कि काकी अब तुम मेरे लंड के फटके खाने के लिए तैयार हो जाओ। फिर सबसे पहले मैंने अपनी दो उँगलियों को उसकी चूत में डालकर महसूस किया कि उसकी चूत मुझे बड़ी टाइट लग रही थी क्योंकि बहुत महीनो से उस चूत की किसी ने जमकर चुदाई नहीं की थी। फिर मैंने मन ही मन में सोचा की यह तो मेरे लिए बहुत अच्छा है, क्योंकि टाईट चूत की चुदाई करने में मज़ा दुगना हो जाता है। फिर मैंने उसके दोनों पैरो को मोड़कर फैलाकर ऊपर की तरफ किया और उसको कहा कि तुम अब इनको ऐसे ही रखना और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत खुलकर ऊपर की तरफ हो गई। अब मैंने अपना सात इंच का लंड उसकी चूत के मुहं पर रख दिया और में दाने को अपने लंड के टोपे से घिसने लगा था, जिसकी वजह वो मदहोश हुई जा रही थी।

फिर वो अब मुझसे कहने लगी थी कि चोद तू मुझे जल्दी से तुम अपना लंड डाल दे मेरी चूत में, तूने मुझे दीवाना बना दिया है, आह्ह्ह्ह अब चोद तू मुझे ज़ोर से चोद और आज तू मेरी इस प्यासी चूत की चटनी बना दे, फाड़ दे। दोस्तों उसके मुहं से यह सब सुनने के बाद मेरे लंड में एक ताकत सी आ गई और फिर मैंने एक ही झटके के साथ अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब वो मेरे उस धक्के की वजह से इतनी ज़ोर से चीखी और चिल्लाने लगी, उसकी वो आवाज पूरे कमरे में गूंज गई ऊईईईई माँ मार दिया ऊफ्फ्फ्फ़ मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है ऊह्ह्ह्ह अब तू बाहर निकाल, ले तेरा यह लंड आह्ह्ह में मर गयी रे और वो रोने लगी। फिर मैंने धीरे धीरे उसके बूब्स मसलना शुरू किया और में धीरे धीरे धक्के देते हुए अब अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा था। फिर कुछ देर बाद काकी को भी मज़ा आने लगा था, क्योंकि उनका वो दर्द कम होने लगा था और वो मेरे धक्को का जवाब अपनी गांड को उठा उठाकर दे रही थी। अब मैंने उनका वो जोश देखकर ज़ोर ज़ोर से झटके देने शुरू कर दिए थे और वो मुझसे लगातार कहे जा रही थी। हाँ और ज़ोर से ऊफ्फ्फ हाँ और ज़ोर से डाल दे पूरा अंदर आज तू फाड़ दे मेरी इस प्यासी चूत को इसकी प्यास को बुझा दे, ऊफ्फ्फ मसल दे रगड़ डाल और ज़ोर से धक्के देकर चोद ओह्ह्ह आअहह और ज़ोर से उऊहह की आवाजे वो अपने मुहं से निकाले जा रही थी।

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फिर कुछ देर बाद मैंने उनको कहा कि अब तुम घोड़ी बन जाओ और वो मेरे कहते ही तुरंत मेरे सामने घोड़ी बन गयी और मैंने पीछे आकर अपना लंड उसकी चूत में दोबारा से डाल दिया और में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसको चोदने लगा था, इस बीच वो करीब दो बार झड़ चुकी थी और पूरा कमरा फच फ़च फ़च की आवाज़ से गूंज रहा था, क्योंकि उसकी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया था और वो उसकी जाँघो से बह रहा था। दोस्तों में भी अब झड़ने के करीब आ चुका था इसलिए मैंने उसको पूछा कि में अपने वीर्य को कहाँ निकालूं? तब उसने कहा कि तुम इसको मेरे अंदर ही निकाल दो। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों बूब्स को पकड़ लिया और में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा था मैंने उसको कुतिया की तरह चोदकर बड़े मस्त मज़े लिए और फिर मैंने अपना गरम लावा उसकी चूत में ही निकाल दिया। दोस्तों मेरा पानी उसकी चूत में जाते ही वो उसको छूकर महसूस करके तड़प उठी और वो मुझसे कहनी लगी कि मेरी चूत में जलन हो रही है।

फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और देखा कि उसकी चूत से थोड़ा सा खून मेरे वीर्य और उसकी चूत के पानी से तरबतर था और हम दोनों फिर उठकर बाथरूम में चले गये और एक दूसरे की चूत और लंड को साफ करने लगे। फिर बीस मिनट के बाद मेरा लंड दोबारा से तन गया था, क्योंकि वो मेरे लंड को सहला रही थी और में उसके बूब्स को मसल मसलकर गरम हो चुका था, जिसकी वजह से हम दोनों में अब एक बार फिर से सेक्स भर चुका था। फिर मैंने उसकी चूत में ऊँगली करना शुरू किया और मैंने उसको भी गरम कर दिया। फिर मैंने उसको कहा कि काकी अब में तुम्हारी गांड मारूंगा, उसने मुझसे कहा कि नहीं मैंने सिर्फ़ अब तक बस दो या तीन बार ही ऐसा किया होगा और वो भी ज़बरदस्ती तुम्हारे काका ने मुझे चोदा था। अब मैंने उसको आग्रह करके कहा कि मुझे भी तुम एक बार दे दो ना और में बहुत आराम से तुम्हारी गांड मारूंगा, जिसकी वजह से तुम्हे दर्द का पता भी नहीं चलेगा। फिर बहुत बार कहने के बाद वो मान गयी और सबसे पहले वो मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी, जिसकी वजह से मेरा लंड एकदम कड़क हो गया।

अब मैंने उसको कहा कि अब तू दोबारा मेरे सामने घोड़ी बन जा और अपना सर नीचे ज़मीन पर टिका दे और अपने दोनों हाथों से अपनी गांड के छेद को पकड़कर फैला ले वरना यह बहुत टाईट है और इसमे अगर मैंने जबरदस्ती अपने लंड को डाल दिया तो तुम दर्द की वजह से चीखने चिल्लाने लगोगी। फिर उसने मेरे कहते ही वैसे ही किया और मैंने जानबूझ कर ज़ोर से मेरा लंड उसकी गांड में एक जोरदार धक्के के साथ उसकी जड़ तक डाल दिया। अब वो उस दर्द की वजह से बिलबिलाकर चीख पड़ी। अब काकी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी और हमारे आस पड़ोस में कोई भी घर में नहीं था, इसलिए वो खुलकर चीख रही थी। फिर दो मिनट के बाद वो सम्भलकर बोली कि तुझे इतनी ज़ोर से डालने के लिए किसने बोला था? अब में कभी भी अपनी गांड में डालने नहीं दूँगी। फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसको चोदने लगा था और वो भी कुछ देर बाद मेरा साथ देने लगी थी और करीब बीस मिनट के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी गांड में निकाल दिया। अब मैंने देखा कि उसकी गांड खून से लबालब हो चुकी थी, मेरे लंड के पानी से उसकी गांड में ज्वालामुखी की तरह पानी बाहर आ रहा था।

दोस्तों उस रात को मैंने अपनी काकी को तीन बार चूत में अपने लंड को डालकर चोदा और दो बार गांड भी मारी और उसकी चुदाई करते हुए कब सुबह हो गयी, हम दोनों को पता भी नहीं चला। फिर दूसरे दिन सुबह मैंने देखा कि रात भर चली उस चुदाई की वजह से अब वो ठीक तरह से चल भी नहीं पा रही थी और में भी रात भर चुदाई करके बहुत थक गया था। फिर वो नहा धोकर मेरे लिए चाय बनाकर ले आई और मेरे पास आकर मुझे उठाया और चाय को पीने के बाद में काकी के निप्पल को चूसने लगा। फिर कुछ देर बाद काकी ने हंसते हुए कहा कि में अभी खाना बनाकर आती हूँ क्योंकि बीस दिन तो अभी कोई भी नहीं आने वाला इसलिए ज़रा तुम आराम भी कर लो, क्योंकि उनके आने तक अब में बस तुम्हारी ही हूँ। दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर खुश हो गया और उसके बाद से जब तक घर वाले वापस नहीं आ गए हम दोनों ने कभी दिन तो कभी रात को जब भी हमारी चुदाई करने की इच्छा होती हम लग जाते वो खेल खेलने। दोस्तों हम दोनों ने उन दिनों अपने मन की सभी इच्छाए हर तरह से चुदाई करके बड़े मस्त मज़े किए जिसकी वजह से हम दोनों बहुत खुश थे और हर बार मेरी काकी ने मेरा पूरा पूरा साथ दिया।

दोस्तों यह था मेरी अपनी चुदक्कड़ काकी के साथ वो सच्चा अनुभव, जिसके हम दोनों को बड़े मस्त मज़े मिले हमने दिन खोलकर हर तरह से चुदाई के मज़े लिए और कभी गांड मारी कभी चूत और कभी मैंने उनके मुहं में अपने वीर्य को डालकर उनको खुश किया ।।

धन्यवाद …

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