बहन का मासिक धर्म

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प्रेषक : शेखर …

हैल्लो दोस्तों, में शेखर एक बार फिर से आप सभी लोगों के लिए अपना एक मस्त मज़ेदार सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरी आज की कहानी आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पढ़ने वालो को जरुर पसंद आएगी, क्योंकि यह मेरा एक सच्चा सेक्स अनुभव के साथ वो घटना है जिसको में बहुत समय से आप तक पहुँचाने के बारे में सोच रहा था और आज ले आया। दोस्तों में एक 20 साल का मस्त अच्छा दिखने वाला गठीले बदन का लड़का हूँ और मेरी लम्बाई 6 फिट और मेरा भरा हुआ बदन है और में पूरी तरह से संतुष्ट करने वाले सेक्स में पूरा विश्वास रखता हूँ और मेरी सोच कहती है कि पहले जहाँ तक हो सके अपने घर में ही यह सब करके देखना और इसके बारे में समझना चाहिए, लेकिन कुछ लोगों को यह काम अपने घर में करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है इसलिए वो हमेशा बाहर ही इसका जुगाड़ करते है और वो कुछ देर सेक्स करके झड़ जाने के बाद दूर हट जाते है और उनके साथ वाला बिना झड़े ही रह जाता है। दोस्तों आप लोग ठंडा दिमाग से सोचो कि जब अगर परिवार में ही माँ, बहन, चाची, कज़िन, मामी, बुआ हो तो उनको अपने इस काम के बारे में बताकर या अपनी तरफ कैसे भी आकर्षित करके यह हमारा काम बन सकता हो तो हम लोग बाहर जाकर अपनी इच्छा को क्यों पूरा करे? हम घर के ही किसी सदस्य के साथ जब यह काम करेंगे उससे बाहर वालों को कुछ पता भी नहीं चलेगा और हमे मज़ा भी उस काम में बहुत आएगा। यह सब मेरे मन के विचार है मेरी सोच यही कहती है।

दोस्तों वैसे हमारे घर परिवार में कभी ना कभी ऐसी घटनाए घट ही जाती है जो आपको अंदर से पूरी तरह झंझोड़कर रख देती है जैसे कभी ग़लती से आप अपनी बहन को कपड़े बदलते हुए देख लेते है या फिर किसी भी लड़की आंटी भाभी या औरत को उसके घर के काम करते समय उसके गोरे उभरे हुए गोलमटोल बूब्स का अचानक से नजर आ जाना या किसी औरत को अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए हम गलती से उसके बूब्स को देख लेते है उस स्थिति में आपका लंड तन जाता है और आपके अंदर फिर हर एक रिश्ते को एक तरफ रखकर वो जोश जाग जाता है आपके मन में बस वो द्रश्य ही रहता है उसके पीछे के रिश्ते नाते सभी को आप बिल्कुल भूल ही जाते है। दोस्तों में आज एक ऐसी ही घटना आपको सभी को बताने जा रहा हूँ जिसमें मेरे साथ भी कुछ घटित हुआ। मेरे घर में मेरे पापा, मम्मी और मेरी दो बड़ी बहनें रहती है। में उम्र में 20 साल का हूँ और मेरी दोनों बहन मुझसे 2 साल बड़ी है। एक बार मेरी माँ ने मुझे पास की दुकान से कुछ सामान लाने को कहा और फिर उन्होंने मेरे हाथ में एक लिस्ट को थमा दिया। में उस दुकान पर जा ही रहा था कि तभी मेरी बहन ने माँ से कहा कि माँ मेरा वो भी खत्म हो गया है और माँ उसकी उस बात का मतलब तुरंत समझ गई, लेकिन में बिल्कुल भी नहीं समझा था। अब मेरी बहन ने उस लिस्ट को मेरे हाथ से ले लिया और उसमे एक बड़ा विस्पर पैकेट लिख दिया। उसके बाद मुझे वो लिस्ट दोबारा पकड़ा दी और उसके बाद में दुकान पर सामान लेने चला गया और में वो सारे सामान खरीदकर ले आया और तब मैंने एक बात पर गौर किया कि उस दुकनदार ने उस विस्पर को एक पेपर में लपेटकर मुझे दे दिया था। फिर घर आते ही मेरी बहने जिनका नाम सोनल और श्रेया दोनों ने आकर उस विस्पर के पैकेट को मुझसे लेकर कहीं छुपाकर रख दिया था और वो सब कुछ देखकर मेरे मन में यह बात खटकने लगी कि यह क्या चीज़ है जिसको इतने सम्भालकर रखा गया है और इसका क्या मतलब है? तो मैंने उसी रात को अपनी बहन से पूछ लिया कि दीदी वो क्या चीज़ थी जो पेपर में थी और जिसको अपने उठाकर कहीं छुपाकर रख दिया है? दोस्तों पहले तो दीदी मेरे मुहं से वो बात सुनकर एकदम घबरा गई, उनके बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि वो मेरे इस सवाल का क्या जवाब दे? फिर वो थोड़ा सा शांत होकर कुछ सोचकर मुझसे बोली कि यह सब तेरे मतलब का नहीं है तू अब जाकर पढ़ाई कर, लेकिन दीदी ने मुझे उसके बारे में कुछ भी नहीं बताया। एक बार घर पर कोई नहीं था तब मैंने रात के समय अपनी दोनों बहनो को चाय बनाकर दी और फिर मैंने जानबूझ कर उनसे दोबारा फिर से वही पुराना सवाल किया। फिर इतने में श्रेया ने मुझे बता दिया कि मेरा अभी पीरियड्स चल रहा है और मुझे इन दिनों में इसकी बहुत ज़रूरत होती है। फिर मैंने उससे कहा कि यह आप अपनी पेंटी में लगाती हो ना? तब मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो एकदम से चकित हो गयी और वो कुछ देर सोचकर बोली कि हाँ और उस दिन से हम भाई बहन एक दूसरे से बहुत ज़्यादा घुल मिल गये थे, सोनल 21 साल की बहुत सुंदर हॉट सेक्सी और वो 34 इंच के बूब्स वाली मस्त लड़की थी और श्रेया की गांड बहुत मस्त थी, लेकिन उसके बूब्स छोटे थे। मुझे अपनी बहन पर सेक्स के विचार आने लगे थे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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एक बार सर्दियों के मौसम में हम सभी लोग हमारे गाँव गए हुए थे और तभी मेरे पापा और मम्मी वहीं गाँव से और कहीं किसी रिश्तेदार से मिलने चले गये उसके बाद बस में मेरी दोनों बहने सोनल और श्रेया अपने गाँव में ही रुक गये और उस समय बहुत ज्यादा ठंड थी और गाँव में लाइट भी नहीं होने की वजह से बहुत ज्यादा अंधेरा था। फिर कुछ देर बाद सोनल ने श्रेया के कान में कुछ कहा, लेकिन वो दोनों अब डर गयी और वो बोली कि तू अकेली चली जा, में नहीं जाउंगी मुझे बहुत डर लगता है। फिर मैंने उनसे पूछा कि तुम लोग के बीच में ऐसी क्या बात है? तब श्रेया ने मुझसे कहा कि सोनल को टॉयलेट जाना है और उसको अंधेरा होने की वजह से डर लग रहा है। दोस्तों में आप लोगो को बता दूँ कि गाँव में हम लोगों का टॉयलेट कमरे से थोड़ा दूरी पर अलग हटकर था और वहाँ पर बहुत अंधेरा सन्नाटा भी बड़ा था। फिर मैंने मन ही मन खुश होकर उस अच्छे मौके का फ़ायदा उठाकर उसी समय सोनल को मेरे साथ टॉयलेट चलने को कहा, पहले तो वो नहीं मानी, लेकिन बाद में वो मुझे अपने साथ ले गयी। वो उस समय सलवार कमीज़ और उसके ऊपर एक स्वेटर पहने हुए थी। में अपने साथ में एक लेम्प लेकर गया था। उसने टॉयलेट के अंदर जाकर उसका दरवाजा लगा लिया वो दरवाजा बहुत पुराना होने की वजह से उसमे बहुत सारे छोटे बड़े छेद भी थे तभी मैंने एक छेद से अंदर झांककर देखा तो पाया कि सोनल अब अंदर खड़ी होकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल रही थी और फिर वो अपनी सलवार को नीचे करके अपनी लाल रंग की पेंटी को भी उसके साथ नीचे करके उसी समय नीचे बैठकर पेशाब करने लगी। दोस्तों में आप सभी को बता दूं कि लड़कियाँ जब भी बैठकर पेशाब करती है तब एक बड़ी ही अजीब तरह की मादक आवाज़ आती है और अब वैसी ही वो आवाज़ मेरे कानों में उसके पेशाब करने की वजह से गूँज रही थी उस आवाज को सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर वो कुछ देर बाद बाहर आ गयी उसके बाद हम दोनों वापस कमरे में चले गये और इस घटना के बाद मेरा जीवन बिल्कुल सा बदल गया था। अब में दिन रात सोनल को अपने सपनों में लाकर उसको चोदने लगा था और उसके मज़े लेने लगा था। फिर कुछ दिनों के बाद एक बार फिर से मेरे पापा, मम्मी किसी शादी में बाहर गए हुए थे इसलिए घर पर में सोनल और श्रेया ही थे तब मैंने मन ही मन में सोचा कि अपने सपनों को पूरा करने का बस यही एक अच्छा मौका है। वो गर्मियों का समय था तब सोनल एक स्कर्ट पहने हुए थी उसका टॉप गरमी की वजह से आने वाले पसीने से बिल्कुल भीग चुका था और एक साइड से उसके बूब्स का आकार मुझे साफ नजर आ रहा था। रात को सोने के समय में सोनल की अलमारी से श्रेया की एक पेंटी चुराकर ले आया और उसको अपनी पेंट में रखकर में सोनल और श्रेया के बीच में सो गया।

फिर रात को में अपना पांच इंच का लंड पेंट से बाहर निकालकर अब उसकी पेंटी से रगड़ने लगा था और में उस समय बहुत जोश में था तभी इतने में श्रेया की नींद खुल गयी और मेरे हाथ में अपनी पेंटी को देखकर वो सबसे पहले उसने अपने स्कर्ट को छूकर देखा तो उसको शायद यह लगा कि मैंने सपने में उसकी पेंटी को खोल दिया हो वो बहुत गबरा गई और वो मुझसे बोली कि यह तुम क्या कर रहे हो? तुम्हे क्या चाहिए में सबको हल्ला करके बता दूँगी? तुम जाओ यहाँ से? मैंने कहा कि हल्ला मत करो मेरी प्यारी बहन यह तो जिंदगी का मज़ा है अब हम छोटे बच्चे नहीं रहे। अब जवानी आ गयी है और उसके कुछ गुण भी आ गये है, हमारी यह सब इच्छाए तो शादी के बाद पूरी होगी ही, लेकिन क्यों ना इसको थोड़ा सा हम आज ही करके देख ले? सोनल भी तब तक हम दोनों कि वो बातें सुनकर उठ गयी थी और मुझे उसके चेहरे से साफ साफ पता चल रहा था कि उसको मेरा कहना एकदम ठीक लगा। वो भी अपने मन में मेरे जैसे ही विचार रखती है, इसलिए उसने अपनी तरफ से मेरी बातें मेरी उस सोच का बिल्कुल भी विरोध नहीं किया और शायद वो भी अब मेरे साथ सेक्स के मज़े लेने के लिए तैयार थी। फिर कुछ देर बाद ठीक वैसा ही हुआ और मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उन दोनों की स्कर्ट को तुरंत खोल दिया और फिर उनके बाद टॉप को भी उतार दिया था, जिसकी वजह से अब हम तीनों उस समय केवल अंदरगार्मेंट्स में थे और उसके बाद हमारे बीच में वो खेल शुरू हो गया, जिसके में बहुत लंबे समय से सपने देखता आ रहा था और फिर उस दिन मैंने पूरी रात भर सोनल को बड़े मज़े लेकर चोदा और उनकी वो पहली चुदाई के साथ साथ एकदम टाईट कुंवारी चूत होने की वजह से उन दोनों को बहुत दर्द हुआ और मैंने उनके दर्द को ध्यान में रखकर बहुत आराम से धीरे धीरे उनकी चुदाई के मज़े लिए और फिर मैंने अपना सारा वीर्य श्रेया के मुहं में डाल दिया और उस रात के बाद हम तीनों धीरे धीरे अनाड़ी से उस खेल में खिलाड़ी बनते चले गए। हम तीनों ने जब भी जैसा भी हमे मौका मिला हमने उसका फायदा उठाकर चुदाई के पूरे पूरे मज़े लिए और वो हर बार मेरे साथ चुदाई करके बहुत खुश हुई और में उनको चोदकर मज़े लेने लगा था ।।

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धन्यवाद …

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