आकाँशा को डाटा स्ट्रक्चर्स सिखा डाला

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प्रेषक : सूरज पाटिल …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सूरज है और मेरी उम्र 26 साल है। दोस्तों मैंने आज तक सिर्फ़ एक ही लड़की के साथ सेक्स किया है और दूसरी लड़की के साथ सिर्फ़ किसिंग की है। दोस्तों में आज आप सभी को जो सेक्स अनुभव अभी बताने जा रहा हूँ वो उस लड़की का है जो मेरी पहली वाली गर्लफ्रेंड थी और उसके साथ में करीब 5-6 बार सेक्स कर चुका हूँ, लेकिन उसके साथ हुआ मेरा पहला सेक्स में कभी भी भूल नहीं सकता। दोस्तों यह तब की बात है जब मेरे कॉलेज का दूसरा साल ख़तम होने वाला था। आपको अंदाज़ा हो ही गया होगा कि मेरी उम्र करीब 21-22 साल थी। उस समय में बहुत पतला हुआ करता था और उस वक़्त में बहुत टेंशन में भी रहता था, क्योंकि मेरी हमेशा तबियत खराब रहती और जिसका कारण मेरी पहले साल हुई पढ़ाई की नाकामयाबी थी और सभी लोग मुझसे ना जाने क्यों थोड़ा दूर ही रहते थे और में अब इन सब चीज़ो से बहुत उब चुका था और फिर मैंने एक दिन तय कर लिया था कि में अब यह सब कुछ बदल डालूँगा। मैंने अब मन लगाकर अपनी पढ़ाई करना शुरू कर दिया था और फिर में बहुत जल्दी सभी बच्चो से पढ़ाई में आगे निकल चुका था और मेरे खुश रहने की वजह से मेरी तबीयत में भी अब धीरे धीरे बहुत सुधार रहा था और अब मुझे एक गर्लफ्रेंड की ज़रूरत थी जो बहुत ही सुंदर हो, लेकिन मुझसे हिम्मत नहीं होती थी किसी को अपने प्यार के बारे में कहने सुनने कि, लेकिन फिर एक दिन मेरा सोया हुआ नसीब तब उस दिन खुल गया जब में पहली बार आकाँशा से मिला।

दोस्तों आकाँशा मेरे कॉलेज में मेरी ही क्लास में थी और में उसकी सुंदरता का वर्णन पूरा करूं तो उसकी आखें काजल से काली और उसकी हंसी किसी को भी एक बार में घायल कर देने वाली थी। उसके वो खुले बाल जो उसके नितंब तक लंबे थे और पूरा भरा हुआ गोरा बदन जो किसी की भी नियत खराब कर दे। दोस्तों वार्सिकोत्सव वाले दिन तो उसने काली कलर की पूरी जालीदार साड़ी पहनी हुई थी, जिसमे से मुझे उसका ब्लाउज साफ साफ दिख रहा था और उसके बूब्स के उभार की वजह से उसके थोड़ा झुकने पर भी उसके ब्लाउज के बीचो बीच पड़ने वाली दरार मुझे साफ साफ दिखाई पड़ रही थी। दोस्तों वो दरार तो मानो इतनी तंग थी कि शायद उसमे एक उंगली घुसाने में भी बला का ज़ोर लग जाए खैर वो तो वो दिन था। अब में उस दिन से ही उससे बात करने का कोई ना कोई बहाना चाहता था, लेकिन कभी यह काम मुमकिन नहीं हो पा रहा था, लेकिन उस दिन तो मेरे नसीब में कुछ और ही लिखा हुआ था, मानो खुदा ने खुद मेरी इच्छा पूरी करने की ठान ली थी। उस दिन वो खुद मेरे पास आई और मुझसे बोली कि हैल्लो सूरज कैसे हो, क्या तुम मेरी एक मदद करोगे? दोस्तों अब मेरे नाम के आगे का सब मुझसे अनसुना हो गया था उसे मेरा नाम पता था कि में इसी खुशी में मेरे अंग अंग में एक बिजली की तरंग सी दौड़ गई थी और मुझसे जवाब ना पाने पर उसने मुझे फिर से वही सवाल किया। क्यों सुना, क्या कहा मैंने? मेरे माथे से बहता हुआ वो पसीना देखकर अचानक से वो खिलखिलाकर हंस पड़ी और मुझसे कहने लगी कि कितने बुद्धू हो तुम? लड़कियों से बात करने में इतना भी भला कोई डरता है क्या? दोस्तों उसका वो सवाल औपचारिक था जिसकी वजह से में भी उसकी बात का जवाब ना देते हुए हंस पड़ा और उससे कहने लगा कि माफ़ करना मुझे थोड़ी कम आदत है किसी लड़की से बात करने की, हाँ तुम बताओ कि तुम्हे मुझसे ऐसी क्या मदद चाहिए थी?

वो अभी भी मेरी तरफ देखकर हंस रही थी और उसकी वो हंसी मुझे उसके और भी करीब खींचती जा रही थी। अब वो किसी तरह अपना हंसना रोकते हुए मुझसे बोली कि क्यों तुम डाटा स्ट्रक्चर्स में बहुत होशियार हो ना? मेरा एक तो “सी” प्रोग्राम ज्यादा अच्छा नहीं है और ऊपर से यह डाटा स्ट्रक्चर्स यूज़िंग ”सी”, अब तुम ही बताओ में कैसे पास करूँ यह विषय? दोस्तों उसने जिस मासूमियत से मुझसे यह सवाल किया था। मेरा बस चलता तो में अपना छोड़कर सीधा उसी का पेपर दे देता। फिर मैंने उससे कहा कि वो बहुत आसान है, तुम मेरे नोट्स ले जाओ और तुम उसमें से पढ़कर देखो। दोस्तों में जानता हूँ कि में कितना बड़ा गधा था, अगर में चाहता तो उसे सिखाने के लिए पूछ सकता था, लेकिन मेरी अकल तो देखो, मैंने उससे कह दिया कि ठीक है कुछ ना समझ सको तो हम कॉलेज में तो मिलते रहेंगे और तुम मुझसे कभी भी पूछ लेना। फिर उसने मुझसे हाँ कहा और वो मेरे नोट्स को अपनी बाहों में भरकर मुझसे धन्यवाद कहकर मेरे कमरे से बाहर निकल गयी और में वहीं खड़ा खड़ा उसे देखता रह गया।

फिर दूसरे दिन जब वो मुझे मेरे नोट्स वापस करने आई तो उसने मुझसे कहा कि आप बिल्कुल भी बुरा मत मानना, लेकिन तुम्हारी लिखावट बड़ी खराब है जिसकी वजह से में नोट्स को कॉपी नहीं कर पाई। दोस्तों एक तो किसी की मदद करो और ऊपर से यह बात सुनो, लेकिन ना जाने क्यों हर किसी को लड़कियों की किसी भी बात का गुस्सा नहीं आता। अब वो मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम खुद मुझे सिखा सकते हो? तो मैंने तुरंत से उसे “हाँ” में जवाब दे दिया, क्योंकि आख़िर में खुद कल से तैयार जो था और मेरे इस तेज जवाब से पहले तो वो एकदम से बौखला गई और फिर हंस पड़ी और बोली कि ठीक है तो फिर शाम को 6 बजे से पढ़ते है, लेकिन हम मेरे घर पर ही पढ़ाई करेंगे, नहीं तो माँ हमे पढ़ने नहीं देगी, क्यों तुम्हे कोई समस्या तो नहीं है ना? दोस्तों मुझे कौन सी अस्थमा का दिक्कत थी और फिर मैंने जल्दी से उसे हाँ कह दिया और उस दिन से हमने शाम को एक साथ में पढ़ना शुरू कर दिया। वैसे उसका घर कुछ ख़ास बड़ा नहीं था और हॉल से टीवी की आवाज़ बहुत आराम से बेडरूम तक आ जाती थी इसलिए हम हमेशा दरवाजा बंद करके ही पढ़ते थे और उसके परिवार वाले सभी लोग बहुत खुले ख्यालों के थे जिसकी वजह से मेरे घर आने पर उन्हे कोई ऐतराज़ नहीं था और उसकी मम्मी तो मुझे बार बार कुछ ना कुछ खिलती ही रहती थी और मुझे उसके घर वाले बहुत पसंद थे। दोस्तों वो दिन भी बिल्कुल ठीक ही निकला था। में अपने समय से उसके घर पर पहुँच गया और दोस्तों मैंने गौर किया कि वो घर पर कॉलेज की अपेक्षा इतना बन-ठन कर नहीं रहती थी, लेकिन उस दिन उसे कहीं जाना था इसलिए वो बहुत ज्यादा सजधजकर तैयार ही बैठी हुई थी। उसने काले रंग की एक ड्रेस पहनी हुई थी जिसमें से उसकी छाती से ऊपर का भाग काले दानों से भरी जाली से ढका हुआ था और वो ड्रेस उसकी भरी हुई जंघो को बहुत कस रही थी और उसके हाथ में पहनी हुई वो काली चूड़ियां तो मानो सोने पे सुहागा लग रही थी। मेरा मन तो उस दिन बिल्कुल भी पढ़ाई करने का नहीं कर रहा था, बल्कि मेरा तो जी कर रहा था कि में सीधे उसको पीछे से कस लूँ। उस दिन उसने दरवाज़ा नहीं लगाया हुआ था और तभी मुझे लगा कि कहीं उसे मेरी नीयत पर शक़ तो नहीं हुआ, लेकिन बाद में जब उसके घरवालों ने अंदर आकर उसे भी जल्दी से बाहर निकलने को कहा तब बात साफ हुई कि उसने दरवाज़ा इसलिए खुला हुआ रखा था क्योंकि अब घर पर कोई नहीं रहने वाला था।

फिर उसके घर वाले चले गये और उसने सिर्फ़ बाहर का जाली वाला दरवाजा लगाया और अंदर का लकड़ी का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया। हम अंदर आकर किताब खोलकर बेड पर ही बैठ गये, लेकिन वो मुझे आज थोड़ी बैचेन सी लग रही थी क्योंकि उसको उस कसी हुई ड्रेस में बैठ पाना बहुत मुश्किल हो रहा था और में उसकी परेशानी समझ गया था। फिर में किचन में गया और डाइनिंग टेबल वाली कुर्सी लेकर आ गया और अब मैंने उसे उस पर बैठने को कहा तो वो मुझसे धन्यवाद बोलकर उस कुर्सी पर बैठ गयी और अब हम दोनों एक दूसरे के सामने सामने बैठे हुए थे, लेकिन मेरा पूरा पूरा ध्यान बार बार उसकी कसी हुई गोरी और नंगी जांघो पर ही जा रहा था और शायद उसे भी इस बात का पता चल चुका था जिसकी वजह से वो थोड़ी थोड़ी देर में खड़ी होती और अपनी ड्रेस को जितना हो सकता नीचे खींचकर फिर से बैठ जाती। उसके इस संघर्ष और उसके उस परेशान चेहरे को देखकर में उठकर खड़ा हुआ और फिर उससे विदा लेकर अपने घर पर जाने लगा।

मेरे अचानक ऐसे करने से वो शायद समझ गई कि में क्यों जा रहा था? तभी उसने मुझे आवाज़ लगाई और मेरा एक हाथ पकड़ लिया और उसने मुझसे कहा कि तुम जानते हो ना कि तुम कितने अच्छे हो? दोस्तों मैंने जैसे ही मुड़कर उसकी तरफ देखा तो ना जाने मुझे क्या हुआ और अगले ही पल मैंने उसे अपनी तरफ खींचकर अपनी बाहों में भर लिया और उसने अपना मुहं मेरी छाती में छुपा लिया। दोस्तों मैंने कभी इतना करीब से उसके बालों को नहीं सूँघा था और उसके बालों की खुश्बू ने जैसे मुझे अब और भी बढ़ावा दे दिया था। मैंने आख़िरकार उसे उसकी जांघो से पकड़ लिया और में अब धीरे धीरे अपना एक हाथ ऊपर लाने लगा। उसने अपना मुहं मेरे छाती से बाहर निकाला और फिर मुस्कुराकर मुझे देखने लगी। अब मैंने अपना हाथ उसकी जंघो से हटाकर उसके गोरे गालों पर रख दिया और उसे लगातार चूमने लगा। फिर उसने मुझे रोक दिया कुछ समय मेरी आँखों में देखा और फिर हल्के से अपने नाज़ुक होंठो को मेरे होंठो पर रख दिया। दोस्तों वो वक़्त जैसे अचानक से थम चुका था और में अपने सारे गिले शिकवे भूल चुका था। मैंने भी अब उसका पूरा पूरा साथ दिया और हम दोनों पागलों की तरह लगातार एक दूसरे को चूम रहे थे। पहले उसके होंठ, फिर दाँत, फिर जीभ। दोस्तों अब हम दोनों बस एक दूसरे में पूरी तरह डूब चुके थे और हमारे पीछे ही एक बेड था और उसकी पीठ बेड की तरफ थी। मैंने उसे किस करते करते धीरे से पीछे सरका दिया, जिससे हम दोनों ही बेड पर एक दूसरे की बाहों में किताबों पर गिर पड़े और फिर मैंने जैसे तैसे किस करते हुए उन किताबों को वहाँ से हटा दिया और उसे गोदी में उठाकर ठीक प्रकार से बेड पर रख दिया और अब उसकी जांघो से मुझे इस बात का पूरा अंदाज़ा हो गया था कि अब वो भी तड़प रही थी और हम दोनों के जिस्म में आग बराबर लगी हुई थी। में थोड़ा सा पीछे हटा और अब उसे लेटे हुए देखने लगा क्योंकि मुझे उस क्षण पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था और वो उस समय क्या मस्त लग रही थी? और बेड पर लेटने से उसके बूब्स अब और भी ज्यादा उठे हुए लग रहे थे और ड्रेस थोड़ा और उठ जाने से उसकी गोरी नंगी टांगे कमाल की लग रही थी।

अब वो थोड़ा सा शरमा सी गई और उसने अपनी आँखें अपने एक हाथ से छुपा ली और हंस पड़ी। फिर मैंने अपनी शर्ट को उतारा और उसके पास में लेट गया और अब मैंने उसके पैरों पर हाथ फेरना शुरू किया और धीरे धीरे उसके होंठो तक पहुँच गया। मैंने उसका हाथ चेहरे से हटाकर उसे एक बार फिर से चूमा और फिर उसने मुझे ज़ोर से गले लगा लिया। कुछ देर वैसे ही पड़े रहने के बाद में अपना हाथ सरकाते हुए उसकी छाती पर ले आया। उसने कसकर मेरा हाथ पकड़ा और में तुरंत रुक गया। अब उसने मुझसे पूछा कि क्यों तुम मुझसे प्यार करते हो ना सोनू? दोस्तों उसने आज पहली बार मुझे सोनू कहकर पुकारा था और में अब उस ख़ुशी की वजह से सातवें आसमान पर था और फिर मैंने अपना जवाब उसे दिया कि हाँ में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और फिर मेरे यह बात कहते ही उसने मेरा हाथ एकदम से छोड़ दिया और अब दोस्तों मैंने अपनी एक उंगली उसके बूब्स के बीच की दरार में डाल दी, वो एकदम से कराह उठी और उसकी इस आवाज को सुनकर मुझे बड़ा अच्छा लगा और अब मैंने अपनी उंगली को लगातार अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

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अब वो अपनी आहों को रोकने की बहुत कोशिश करने लगी, लेकिन हर बार वो नाकामयाब रही और अब मैंने धीरे से अपनी उंगली बाहर निकाली और फिर अपनी पूरी हथेली को उसके एक बूब्स पर रख दिया दोस्तों में शब्दों में उस अहसास को क्या बताऊँ? मुझे उसके बूब्स कितने गोल, बड़े और कड़क लग रहे थे, लेकिन बीच में उसकी वो जाली वाली ड्रेस आ रही थी। फिर मैंने उसके कपड़े उतारने के लिए उसे उल्टा कर दिया तो मैंने देखा तो उसकी पूरी पीठ पर सिर्फ एक ज़िप थी जिसको में खोलता तो वो एक बार में पूरी नंगी हो जाती। तभी उसने मुझे संकोच में देखा और सिर्फ़ दो शब्द कहे जिनको सुनकर में बिल्कुल दंग रह गया। उसने कहा हाँ अब इसे जल्दी से खोल दो और उसके मुहं से यह शब्द सुनते ही मैंने उसकी पूरी ज़िप को खोलना शुरू कर दिया। उसकी ज़िप नीचे से ऊपर खुलती थी और जैसे जैसे में उस ज़िप को ऊपर ले जा रहा था उसका गोरा बदन मेरी आँखों से रूबरू होता जा रहा था और फिर जैसे ही मैंने ज़िप को उसकी कमर तक खोला तो उसके कूल्हे अब बिल्कुल आज़ाद हो गये थे और अब वो सिर्फ़ एक बहुत ही पतली सी पेंटी में थी और उसकी ड्रेस इतनी टाईट होने के बावजूद भी उसकी पेंटी ना दिखने का कारण शायद यही था। में अब मन ही मन मचल था और फिर से में पागलों की तरह उसे उसके कूल्हों पर चूमने और चाटने लगा जिसकी वजह से उसने अब और ज़ोर ज़ोर से आहें भरना शुरू कर दिया था। फिर मैंने महसूस किया कि उसकी गांड तो बिल्कुल गरम तवे जितनी गरम हो चुकी थी।

अब मेरे होंठ तो जैसे उसे छूने से ही जल रहे थे, लेकिन मुझे बहुत मज़ा भी आ रहा था। मैंने अब उसकी पूरी ज़िप को खोल दिया था और अब वो खुद ही एकदम से पलटकर सीधी हो गई थी जिससे मुझे उसकी वो ड्रेस बाहर निकालने में थोड़ी आसानी हो जाए। मैंने उसकी उस ड्रेस को उतारकर देखा कि अब वो सिर्फ़ हल्के भूरे कलर की ब्रा और बिल्कुल हल्की और लगभग जालीदार पेंटी में मेरे सामने लेटी हुई थी। फिर उसने मुझे देखा और अपना एक हाथ मेरे पेट पर रख दिया और अब वो मेरी बेल्ट को खोलने लगी। थोड़ी उसकी मेहनत और मेरी मदद करने के बाद अब में भी सिर्फ़ अपनी खुली जांघो वाली अंडरवियर में था और अब मेरी अंडरवियर में तो तापमान जैसे आफ्रिका की गर्मियों से भी ज़्यादा हो गया था। अब उसने मेरी अंडरवियर का वो उभार देखा और फिर थोड़ा रुक रुककर धीरे से अपना एक हाथ मेरे लंड पर घुमाने लगी और अब मेरा लंड पूरे ज़ोर पर आ गया, क्योंकि आज से पहले कभी किसी लड़की ने मेरे लंड को छुआ नहीं था और मेरे पूरे शरीर में जैसे कोई सनसनी सी दौड़ गई थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और अब ज़ोर ज़ोर से उससे अपना लंड दबवाने लगा और अब में भी उसकी तरह आहे भरने लगा था और मैंने देखा कि उसकी भी साँसे अब ज़ोर ज़ोर से चल रही थी। तभी अचानक से उसने मेरे सर को पीछे से पकड़ लिया और मेरे शरीर को अपने ऊपर ले लिया और तब पहली बार मेरे लंड ने किसी की चूत को छुआ था। अब में अपनी अंडरवियर पहने ही उसकी पेंटी से ढकी हुई चूत को ऊपर से गोल गोल रगड़ने लगा। दोस्तों में वो रगड़ना चाह कर भी कभी नहीं भुला सकता हूँ, में आपको क्या बताऊँ मुझे उस काम में कितना मज़ा आ रहा था? वो अब ज़ोर ज़ोर से करहाने लगी थी और पूरे रूम में उसके उह्ह्ह अह्ह्ह्हह करने की आवाज़ गूँज रही थी। मैंने रगड़ना और तेज़ कर दिया और फिर उसने मेरा एक हाथ पकड़कर अपने स्तन पर रख दिया। मुझे उसका वो इशारा समझ आया और मैंने तुरंत उसकी ब्रा को भी खोल दिया और अब उसके दूध से भी ज़्यादा गोरे और चाँद से भी ज़्यादा गोल बूब्स जिस पर हल्के लाल रंग के वो निप्पल मुझे ताक रहे थे। अब वो पूरी तरह से नंगे थे। दोस्तों मुझे उन्हें अपने सामने देखकर बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि उसके बूब्स बहुत ही बड़े थे और उन्हें कपड़ो में देखकर मुझे कभी लगा नहीं था कि वो आकर में इतने बड़े भी हो सकते है? फिर उसने मुझे देखा और मुझसे कहा कि तुम बहुत अच्छे हो जानू और वो मेरा सर अपने बूब्स पर रगड़ने लगी। दोस्तों उसमें क्या हवस थी? वो तो मानो एक दूसरी दुनिया में ही पहुँच चुकी थी और वो बिल्कुल पागलों की तरह मेरा सर उसके बूब्स के ऊपर रगड़े जा रही थी और कह रही थी में तुम्हारे साथ हाँ उह्ह्ह्ह हमेशा से ही अहह यह करना चाहती थी। दोस्तों अब मुझे उसकी यह बात सुनकर मेरे कानों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ। में अचानक से रुक गया और उसे देखकर जी भर आया और में सच कहूँ तो उस वक़्त अगर में सेक्स भी पूरा ना करता तो भी मुझे कोई गम नहीं था और अब उसकी वो बिल्कुल नम आखें साफ साफ बयान कर रही थी कि वो मुझसे कितना प्यार करती है।

अब मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और ज़ोर से उसके होंठो पर किस करने लगा। अब वो भी अब अपना पूरा आपा खो चुकी थी और जैसे एक प्यासा बड़ी देर के बाद पानी पिए ऐसे मेरे होंठो को चूसने लगी थी, जिसकी वजह से मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था और थोड़ी देर बाद में एक बार फिर से उसके बूब्स को पहले से ज़्यादा तेज़ चूमने और काटने लगा। अब हम दोनों ही पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे और अब जो भी हमारे साथ हो रहा था वो सब अपने आप हो रहा था। उसने मेरी अंडरवियर को नीचे कर दिया और मेरे कूल्हों को जकड़कर अपनी चूत पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी। उसके एक हाथ की उंगलियों के नाख़ून मुझे बहुत चुभ रहे थे इसलिए में भी अपना पूरा ज़ोर लगा रहा था। अब मैंने एक ही झटके में उसकी पेंटी को निकाल दिया और अब में क्या बताऊँ दोस्तों वो क्या मस्त लग रही थी। वो पूरी नंगी और अब मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसकी चूत को मेरी हथेली से ढक दिया और अब धीरे धीरे रगड़ने लगा जिसकी वजह से उसने तो अब चिल्लाना शुरू कर दिया था। उस कारण से मुझे उसके मुहं पर अपना हाथ रखना पड़ा और मेरा हाथ व्यस्त होने के कारण में उसे चूमते हुए उसकी चूत तक ले गया और बिल्कुल हल्के से उसकी चूत को चाटने लगा।

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अब मैंने महसूस किया कि उसकी चीखने चिल्लाने की आवाज अचानक से रुक गई, लेकिन सिसकियों कि आवाज बढ़ गई और अब उसकी चूत से वो पानी जैसे मेरी प्यास बुझाने के लिए लगातार बहे जा था और में उसका रसपान किए जा रहा था। तभी अचानक से वो काँपने लगी और मेरे पूछने पर उसने मुझे बताया कि उसे अब बहुत ठंड लगने लगी है। मैंने तुरंत बेड को साईड से खोलकर उसमे से एक कंबल निकाल लिया और उसे हम दोनों पर डाल लिया और उससे पूछा क्यों अब ठीक है? तो उसने हाँ कहा और कहा कि अब मुझसे नहीं रहा जाता और जल्दी से मेरी वर्जिनिटी को खत्म कर दो और चोद दो मुझे। दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनते ही मेरे तोते उड़ गये, क्योंकि में खुद आज पहली बार सेक्स का अनुभव कर रहा था और उस पर उसकी वर्जिनिटी खत्म करने का बोझ। अब मैंने उससे साफ साफ कह दिया कि नहीं में यह सब नहीं कर पाऊंगा। दोस्तों मेरे कुछ सोचने से पहले ही मुझे पता नहीं कब मेरे मुहं से यह शब्द निकल गए, लेकिन वो अचानक से बहुत ज़ोर से हंस पड़ी और मुझसे कहने लगी कि तुम तो बहुत डरपोक हो, मुझे अब पता चल गया है। फिर अचानक उसकी हंसी रुकी और मुझे देखते हुए उसने कहा सूरज में सिर्फ़ अपनी वर्जिनिटी नहीं खोना चाहती। में तो अपनी वर्जिनिटी सिर्फ़ तुमसे खोना चाहती हूँ तुम बिल्कुल भी डरो मत में पहले से ही यह निर्णय बहुत सोच समझकर ले रही हूँ क्योंकि में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। उसकी यह बात सुनकर मुझमे जैसे दुबारा जोश भर गया और उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और कंबल के अंदर से ही मुझे मार्गदर्शन देने लगी। वो जगह पूरी तरह सुनिश्चित करने पर उसने अब सब कुछ मुझ पर छोड़ दिया था और अब सारी ज़िम्मेदारी मेरे कंधो पर थी। में धीरे धीरे अपने लंड के टोपे को उस कोमल जगह पर गोल गोल घुमाने लगा और जब उसकी चूत के पानी से मेरा लंड पूरी तरह भीग गया। तभी मैंने अपना लंड चूत के अंदर डालना शुरू कर दिया, लेकिन मेरे कुछ भी ज़्यादा ना करने के बावजूद भी वो रोने लगी, लेकिन मुझसे ना रुकने को भी उसने कहा।

अब मैंने अपने लंड को हल्का सा धक्का देकर चूत के अंदर ही किया और उसके गालों को मेरे हाथों से कसकर थाम लिया जिससे उसकी आखों से आंसू निकल गये और मैंने उसे किस कर दिया और जब उसका ध्यान पूरी तरह से मेरे चूमने पर था तो मैंने अपने हाथ गालों से हटा दिए और उसकी कमर को ज़ोर से कस दिया और फिर एक जोरदार झटका लगा दिया और वो बहुत ज़ोर से चिल्ला गई, लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद मैंने किसी तरह उसके मुहं पर हाथ रखकर उसे शांत कर दिया और कुछ देर उसने मुझे वैसे ही रुकने का इशारा किया और थोड़ी देर बाद उसने फिर से अपने हाथ मेरे कूल्हों पर रख दिये और आगे पीछे करनी लगी, शायद अब उसे मज़ा आने लगा था और उसे ऐसे ज़ोर ज़ोर से सिसकते और आहे भरते देख मुझे भी बड़ा मज़ा आने लगा। मैंने धीरे धीरे खुद को तेज कर दिया और हम दोनों और ज़ोर से आहे भरने लगे।

अब तो में भी चिल्लाने लगा था और हम दोनों को अब किसी भी आवाज़ की कोई फ़िक्र नहीं थी। अब हम खुलकर एक दूसरे के रंग में डूबने लगे और उसकी वो अह्ह्ह अहह की आवाज़ मेरे कानों में अब गूँज रही है और मुझे और भी प्रोत्साहन दे रही थी। हम दोनों अब अपनी पूरी गति पर पहुँच चुके थे और तब मुझे एहसास हुआ कि अब में जल्द ही झड़ने वाला हूँ मेरे उससे कहने पर उसने मुझसे अपनी चूत के अंदर ही वीर्य छोड़ने को कहा और मेरे ना मानने पर उसने मुझे बताया कि वो बहुत पहले से ही इस दिन का सपना देखती आई है और आज वो चाहती है कि उसका पहला यौन संबंध अधूरा ना रहे। उसके कहने पर में उसकी और अपनी स्वयं इच्छा से ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा और फिर अचानक से शरीर में एक ठंड की सनसनी के साथ हम दोनों की एक जोरदार चीख के साथ में उसकी चूत में झड़ गया। दोस्तों वो बड़ी ही पवित्र भावना थी। में अब उसके ऊपर ही लेट गया और उसने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया था। में उसे अपनी पूरी जिंदगी भर वैसे ही जकड़ कर रखना चाहता था और अब उसके अलावा मेरा और कुछ करने का मन ही नहीं था और वो मेरे कंधे पर अपना माथा टेककर रोने लगी और अब में भी उसके साथ थोड़ा सा भावुक हो गया, लेकिन क्या करे? समय का अभाव था इसलिए मैंने उससे कहा कि चलो अब उठो तुम्हे जाना है ना? मैंने उससे बहुत प्यार से पूछा। तो वो उठी और कुछ ना कहते हुए अपनी ब्रा, पेंटी पहनने लगी। उसने अपनी ड्रेस पहनते वक़्त अपने बाल एक तरफ कर दिए और मेरी तरफ पीठ करके मुझे ज़िप लगाने का इशारा किया। मैंने पीछे से उसकी खुली ड्रेस में से अपना हाथ आगे की तरफ डालकर उसे पेट से पकड़कर अपने से सटा लिया और सामने लगे अलमारी के काँच में हम दोनों एक दूसरे को निहारने लगे। दोस्तों में सच कहूँ तो उस वक़्त में उस आईने में हम दोनों को एक पति, पत्नी की रूप में देख रहा था और सपने सज़ा रहा था कि हम दोनों शादी के बाद कुछ इसी तरह रोज रात को प्यार करा करेंगे और सुबह साथ उठेंगे दोस्तों वो बड़ा ही हसीन पल था। अब वो मुझसे चलो हटो प्लीज छोड़ दो कहकर वो मुस्कुरा पड़ी और बोली कि प्लीज मुझे जाने दो। अब मैंने भी मुस्कुराकर अपना हाथ उसके गरम बदन से हटा लिया और फिर मैंने उसकी ज़िप को बंद कर दिया। कुछ देर में ही हम दोनों घर से एक साथ ही बाहर निकल गये और फिर उसने अपनी स्कूटी स्टार्ट कर दी। में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ उसने मुझसे बड़े ही प्यार से से कहा।

अब वो मेरी तरफ मुस्कुराकर अपना हेलमेट पहनकर चली गई, लेकिन उस दिन के बाद भी हमने कई बार सेक्स किया और अगली बार के लिए तो मैंने उससे यह आग्रह भी किया था कि हम अपना अगला सेक्स मेरी पसंद के कपड़े में ही करेंगे और वो दिन भी हमारा बहुत यादगार रहा और में आप सभी को उसके बारे में अपनी अगली कहानी में ज़रूर बताऊंगा, लेकिन दोस्तों कुछ भी कहो पहला सेक्स तो पहला ही होता है। मेरी बदनसीबी से कॉलेज ख़त्म होने पर उसे पुणे छोड़कर मुंबई में नौकरी के कारण जाना पड़ा और फिर हमारी बातचीत अब धीरे धीरे कम होते होते ख़त्म ही हो गई ।।

धन्यवाद …

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